मंगलवार, 29 सितंबर 2026

शिक्षकों मनोदशा यह भी होती है।

 स्थानांतरण पश्चात शिक्षकों की शिक्षा व बच्चों के प्रति मानसिकता का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण :-


  लगभग शिक्षक नये स्कूलों में जाकर वर्तमान स्कूल में काम करने वाले पुराने शिक्षकों पर न पढ़ाने का दोष मढ़ रहे हैं । 

वे अपने पुराने स्कूल के बच्चों को होशियार बता रहे हैं लेकिन वर्तमान स्कूल के बच्चों को पढ़ाई में नालायक बता रहे हैं । हैरानी की बात यह पता चलती है कि जो शिक्षक यह कहते मिलते हैं यदि उनके पुराने स्कूल में जाकर देखा जाए तो वहाँ स्थित वही मिलती है जो वे नये स्कूलों की बता रहे हैं । 


दूसरा यह भी देखने में आ रहा है कि शिक्षक नये स्कूलों में मानसिक रूप से जगह नहीं बना पा रहे हैं । वे अपनी पुरानी यादों ,संबंधों,सुविधाओं,अकारण अवकाश प्राप्त करने,जैसी स्थिति को भुला नहीं पा रहे हैं ( बच्चों को याद 10% ही करते हैं ) वे अपने पुराने सुखों के संबंधों की तुलना नये स्कूलों में कर रहे हैं । अर्थात स्थानांतरण से सुखों पर क्या असर पड़ा है यह अधिक चिंतनीय भाव उनके चेहरों पर व बातचीत में साफ झलकता है । 


घर से स्कूल की दूरी भी कुछेक में चर्चा है लेकिन वर्तमान गतिमान समय में यह इतना महत्वपूर्ण नहीं है सभी साधन संपन्न हैं पुराने समय में शिक्षकों को हम सबने 40किलोमीटर तक साइकिल से स्कूल आते जाते देखा है । 


यह विचारणीय आलेख है इस आलेख से वास्तविक रूप से परिश्रम करने वाले अध्यापकों को क्रोध नहीं आएगा । ऐसा मेरा विश्वास है ।


सूबे सिंह सुजान,कुरूक्षेत्र