कहानी - ज़ुल्मोगारत
एक आदमी दूसरे देश से आया था उसने एक सहनशील धार्मिक व्यक्ति से आश्रय मांगा उसने अपने घर में रहने को जगह दे दी कुछ दिन बाद वह उस मकान मालिक और उसकी मदद करने वाले को ही घर से निकालने लगा तो पंचायत हुई और उस घर में से आधा उसको दिलवा दिया जब उसको उसमें से आधा घर मिल गया तो उसने अपने बच्चे तो आधा मिले घर में भेज दिए लेकिन ख़ुद उसी मकान मालिक के घर में रह गया और फिर उसको उस घर से निकालने की चालें चलने लगा कभी कुछ चुराना, कभी लड़ाई, दंगा, कभी बलात्कार यही करता रहता है और वह धार्मिक व्यक्ति सब सहन करने को मजबूर है और उस गांव में जो विदेश पढ़ लिखकर आए थे वह उस धार्मिक व्यक्ति को कहते हैं आप इसको रहने दो और तुम कोई ओर जगह रह लो यह पढ़े लिखे बुद्धिजीवी व्यक्ति संविधान की दुहाई देते हुए अन्याय करते थे
इस तरह वह व्यक्ति अपने घर से निकाल रखा है और उस गांव में ज़ुल्म करने वालों से चंदा लेकर कुछ विदेश से आए लोग बुद्धिमान का पुरस्कार लिए हुए हैं।
सूबे सिंह सुजान

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें