पर्यावरण ख़राब है यह सब कहते हैं लेकिन क्यों ख़राब है?
कैसे ख़राब है? कौन ख़राब कर रहे हैं?
और कैसे सुधारें?
और सबसे बड़ी बात जो सुधारने की कोशिश कर रहा है उसका सहयोग कोई कर रहा है या उसका भी अपमान कोई कर रहा है अर्थात उसको सुधार करने से कैसे झूठे ऐजेंडा चला कर रोक रहे हैं??
यह सवाल बहुत हैं एक जागरूक नागरिक तो समझ सकता है और बहुत लोग धीरे-धीरे समझ भी रहे हैं।
जिस दिन इन जागरूक लोगों की संख्या और बढ़ जाएगी तो सुधार भी होगा।
लेकिन सबसे मुख्य बात यह है कि पर्यावरण में सुधार सबसे ज्यादा और तीव्रता के साथ प्रकृति ही करती है और मनुष्य पर्यावरण का केवल नुकसान व ह्रास ही करते हैं।
सब प्राणियों में मनुष्य ही प्रकृति का विनाशक है।
दूसरे पहलू पर ग़ौर करें कि सरकार ने एक पेड़ मां के नाम।
इस अभियान को बेसिक स्तर पर नई पौध अर्थात स्कूलों में बच्चों के बीच चलाया है और पिछले सात आठ सालों से यह कार्यक्रम चल रहा है
हर साल लाखों पेड़ लगाए जा रहे हैं सरकार के आज तक के सबसे ज्यादा सकारात्मक प्रयास हुए हैं।
लेकिन इस मुहिम को जिन लोगों ने नहीं अपनाया और इसमें सहयोग नहीं किया? क्या वह पर्यावरण के प्रति सकारात्मक हैं???
👉 लेकिन झूठ के सारे ऐजेंडा वह चलाते हैं लेकिन सकारात्मक एक भी काम नहीं करते हैं??
तो क्या आम सामान्य नागरिक इस बात को नहीं समझते?
समझते हैं जनाब।
लेकिन बहुत धीरे-धीरे धीरे-धीरे समझते हैं और उसके परिणाम हमारे सामने धीरे धीरे आ भी रहे हैं।
👉पिछले करीब सत्तर सालों से बहुत से झूठे और आधारहीन नरेटिव चला कर ग़लत आदमी, ग़लत सोच को ही सही बनाकर पेश किया गया है!!!!
देखिए!!!! सड़क किनारे, नहरों, राजबाह व पंचायत की ख़ाली जमीनों पर सरकार वन विभाग द्वारा जितने भी पेड़ लगाए गए थे उन सभी पेड़-पौधों को इसी झूठे ऐजेंडा के तहत तैयार की गई छवि द्वारा नष्ट कर दिया, जला दिए, कीटनाशक दवा द्वारा सुखा दिए गए हैं
और वह छवि 👉 कि किसान मसीहा है किसान ही भोजन देता है इस बात में धरातल की ही नहीं प्राकृतिक सच्चाई है कि वह अनाज उगाता है लेकिन इसी बड़ी छवि की आड़ में उसी ने पर्यावरण को हर संभावना से दरकिनार किया है।
तो क्या एक अच्छा काम करने वाले ने कोई एक ग़लत काम कर दिया तो इसकी बुराई नहीं करें??
या उसको सज़ा न दी जाए??
बस इसी छवि का अनावश्यक रूप से दोहन करते हुए सब पेड़ पौधे नष्ट कर दिए जाते हैं और उन्हें कोई कुछ कह नहीं सकता यदि कहें तो उस पर ऐजेंडाधारी राजनीतिक लोग व दल उसका दुरूपयोग करते हैं और सरकार का पेड़ लगाने की मुहिम को तो शून्य में धकेल दिया जाता है साथ ही टैक्स देने वाली जनता का पैसा और सरकारी बजट भी पेड़ पौधे के साथ सूख जाता है और अन्य कार्यों से भी वंचित रह जाते हैं।
👉हम सही को सही और ग़लत को ग़लत नहीं कह पाते हैं?? और इसका कारण सत्य को झूठ में बदलने की जो विदेशी ताकतों द्वारा ऐजेंडा चलाने और उनके अनुयाई दलों द्वारा भारत में संचालित होने से हुआ है।
उन विदेशी ताकतों ने पहले भी भारत का दोहन किया है और अब भी अपने व्यापारिक हितों के लिए प्रयोग करते रहे हैं।
और वर्तमान समय में जब सरकार इच्छाशक्ति, स्वाभिमान से कार्य करने लगी तो यही विदेशी ताकतें बिलबिला उठी हैं और भारत को अस्थिर करने में लगी हुई हैं
👉हमें जागना होगा और देशहित में आगे आना होगा अपनी युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाना होगा और बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ना होगा।
👉 धर्म का अर्थ कर्तव्य है
👉और यह केवल सनातन संस्कृति में ही अर्थ प्रयुक्त होता है लेकिन यह अर्थ प्राकृतिक प्रक्रिया द्वारा संचालित है।
👉हमारा कर्तव्य हर काम के प्रति सकारात्मक है तो हम न्याय कर रहे हैं यदि नकारात्मक है तो हम अन्याय कर रहे हैं।
👉 यदि हम खेती में प्रयुक्त ज़मीन को पांच साल के लिए ख़ाली छोड़ दें तो आप पायेंगे कि प्रकृति पांच सालों में उस ज़मीन पर अपने आप लाखों पेड़ उगा देगी और पर्यावरण शुद्ध हो जाएगा।।।
लेकिन क्या आप ऐसा कर पाएंगे????
बस यही मुख्य कारण है कि हम पर्यावरण को शुद्ध न करने में सब शामिल हैं।
सूबे सिंह सुजान



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