समस्याएं पैदा की जाती हैं समस्याएं ठीक करने के लिए।
यह प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया है जैसे बहुत अधिक गर्मी इसलिए होती है गर्मी को कम करने के लिए अर्थात अत्यधिक गर्मी होने के पश्चात मौसम में परिवर्तन होता है और बरसात होती है प्रकृति ने क्या प्रयोग किया गर्मी को ठीक करने के लिए गर्मी का ही प्रयोग किया जैसे लोहे को काटने के लिए लोहा ही इस्तेमाल किया जाता है यह प्राकृतिक प्रक्रियाएं हैं।
इसी प्रकार समाज में परिवर्तन लाने के लिए प्रकृति द्वारा कुछ ऐसी प्रक्रिया की जाती हैं कि मनुष्य की कुछ समझ में शीघ्रता से नहीं आता किसी एक ऐसी समस्या को ठीक करने के लिए कुछ दूसरी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं और वह समस्याएं प्रक्रिया स्वरूप में फिर उन समस्याओं को ठीक करती हैं समाज में इस प्रकार की प्रक्रिया भी निरंतर होती रहती हैं वह भी प्राकृतिक प्रक्रिया का एक बिंदु हैं
मैं यहां पर यह भी जोड़ना चाहता हूँ, भारतीय समाज में जब जातियों में की भेदभाव समस्या पैदा हुई है वह समस्याएं कालांतर में अत्यधिक सामाजिक समानताएं और मनुष्यता के उच्च स्तरीय गुणों के निरंतर स्थिर रहने,होने के कारण पैदा हुई हैं अब उनको ठीक करने के लिए समाज में पुनः जातियों का सरलीकरण मिलन प्रक्रिया हो रही है जबकि समाज इस समय में एक जाति से दूसरी जाति में मिलना जुलना रिश्ते करना एक छोटी सोच मानते हैं परंतु यही प्रक्रिया जातियों को एकीकरण करने के लिए प्रकृति द्वारा इस्तेमाल की जा रही है जैसे हरियाणा के संदर्भ में ले तो हरियाणा के समाज में बेटियों का अत्यंत कम होना और फिर उसके प्रत्युत्तर में हरियाणा का समाज हिमाचल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार व पश्चिम बंगाल तक से लड़कियों से शादी करने लगा। यह एक ऐसी प्रक्रिया घटना घटी है जिससे विभिन्न जातियों और समाजों का एकीकरण होना प्रारंभ हो गया है और इस तरह की घटनाएं पूरे देश में, विभिन्न राज्यों में घट रही हैं अंततः यह एक तैयारी है एकीकरण , समानता,सनातन या हिंदुत्व के लिए प्रयोग किया गया है यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिस प्रकार यह समाज जातियों में बांटा गया,टूटा या विदेशी ताकतों द्वारा तोड़ा गया और अशिक्षा के कारण यह प्रक्रिया हुई थी अब इसी प्रक्रिया को ठीक करने के लिए प्रकृति द्वारा ऐसी प्रक्रियाओं का घटनाक्रम पुनर्गठन है और समाज में एकीकरण हो रहा है यह भारतीय संस्कृति के लिए भारतीय समाज के लिए हिंदुत्व के लिए सनातन के लिए पुनः जागृति काल है।
सूबे सिंह सुजान


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